Sunday, 3 August 2014

FAREWELL  POEM 

एक कविता जो मैंने कई शेर से मिलकर बनाई  हुई है।  और हमारे जूनियर्स के द्वारा आयोजित विदाई समारोह में सुनाई थी। फ्रेंडशिप डे पर यह कविता MCA  SVITS  को समर्पित :-




वो कालेज की सीधी पर प्यार भरी बातें
वो syllabus की tention , वो exam की रातें
वो कैंटीन की पार्टी , वो बर्थडे की लातें
वो रूठना, मनाना , वो बंक वो मुलाकातें।


वो साँवेर रोड की हवा , वो लिफ्ट लेने का मज़ा
वो सिटी बस की भीड़ , वो इंतेज़ार की तकदीर
वो कल का topic, आज समझ में आने की आस
वो फैकल्टी का कहना , LEAVE THE CLASS. 

वो बस स्टॉप पर खड़े होकर , अनजाने चेहरों का पड़ना
वो दूसरो की गैर्लफ्रैण्ड को देखकर, मन ही मन में कुढ़ना
वो लैब, वो लाइब्रेरी, वो सोना temporary.
वो मूवी, वो म्यूजिक, वो प्रोग्रामिंग का मैजिक।

वो एक साल में तीन एग्जाम का निपटाना
वो आठ महीनो का पहला सेमेस्टर झेल जाना
वो लाइब्रेरी में छुपी किताबों का खोजना
वो बुक के लेट सबमिशन पर फाइन से बचना

वो पलासिया, रीगल का किनारा, उसमे वो छप्पन का नज़ारा
वो पीवीआर, INOX का सिनेमा, वो घूमना जैसे हो आवारा।
वो मॉल से शॉपिंग, वो गुरुकृपा का खाना
वो ग्रुप में एक साथ, कहीं भी बाहर जाना

वो सीनियर्स की अनुपस्थिति में, फ्रेशर पार्टी का करना
हर रिजल्ट के आने के बाद, वो ख़ज़राना पर मिलना
वो क्लास की तड़ी लगाकर, काशी मंदिर तक चलना

वो गोम्म्टगिरि का मंदिर, वो रालामंडल की हरियाली
वो बीजासन का दृश्य, जहाँ आता है आनंद भारी

वो SVITS के  handsome ;) लड़के
वो ऑरविन्दो की शर्मीली लड़कियां
वो मेघदूत गार्डन की चौड़ी सड़के
जहाँ कितने है दिल धड़कते


अब कितने बचे रहे वो दिन 
और कितनी बची रही वो रातें 
अगर कुछ बचेगा तो बस ये
इंदौर और वैष्णव की यादें . . . . . 



सप्रेम
अभिषेक अलया ( संकलक व संपादक )










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